गर्भवती गायों की देखभाल: समस्या, बचाव और समाधान के सरल उपाय

प्रसव से पहले और बाद की अवधि गायों के जीवन का सबसे संवेदनशील समय होता है। इस दौर में सही देखभाल, संतुलित आहार और निगरानी से न केवल बछड़े का स्वास्थ्य अच्छा रहता है, बल्कि माँ गाय की दुग्ध क्षमता और जीवनकाल भी बढ़ता है। यदि इस समय सावधानी न रखी जाए, तो कई जटिल समस्याएं हो सकती हैं।

 

आम समस्याएं:

(क) मिल्क फीवर (Milk Fever):
कैल्शियम की कमी से होने वाली बीमारी। प्रसव के बाद अचानक कमजोरी, खड़ा न हो पाना, कंपन इत्यादि इसके लक्षण हैं।

(ख) रेटेन्ड प्लेसेंटा (Placenta न गिरना):
प्रसव के बाद गर्भाशय से पूंछ की झिल्ली समय पर न गिरना।

(ग) कीटोसिस:
शरीर में ऊर्जा की भारी कमी होने पर गाय सुस्त हो जाती है और दूध कम हो जाता है।

(घ) मेटाबोलिक स्ट्रेस:
प्रसव से पहले और बाद, शरीर में हार्मोनल और पोषण संबंधी असंतुलन की वजह से थकावट, भूख कम होना और वजन गिरना।

 

रोकथाम के उपाय:

  • संतुलित आहार:
    गर्भवती गायों को प्रसव से 25 दिन पहले और 25 दिन बाद तक ग्वाला ट्रांज़िशन मिक्स टोटल 50 जैसे विशेष फॉर्मूले वाले आहार देने से मेटाबॉलिज़्म सुधरता है, और कैल्शियम-फॉस्फोरस संतुलन बनता है।
  • समय पर खुराक बदलना:
    प्रसव के पहले महीने गाय को धीरे-धीरे उच्च ऊर्जा वाला आहार देना शुरू करें, ताकि शरीर तैयार हो सके।
  • प्रसव के बाद की देखभाल:
    गाय को साफ और सूखे स्थान में रखें, झिल्ली समय पर गिरी या नहीं इसकी निगरानी करें, और बुखार जैसी स्थिति हो तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
  • साफ़ पानी और आराम:
    गाय को हमेशा ताज़ा और साफ पानी दें। आरामदायक वातावरण प्रसव को आसान बनाता है।

क्या करें और क्या न करें:

करें न करें
प्रसव से पहले विशेष आहार देना शुरू करें आखिरी समय तक सामान्य आहार पर न रखें
पशु डॉक्टर से नियमित चेकअप कराएं बीमारी के लक्षण नजरअंदाज न करें
गाय के शरीर की स्थिति (BCS) पर ध्यान दें कमजोर गाय को मेहनत वाले कार्य में न लगाएं
गाय को शांति और स्वच्छता वाला माहौल दें गंदगी या भीड़भाड़ में न रखें