प्रसव से पहले और बाद की अवधि गायों के जीवन का सबसे संवेदनशील समय होता है। इस दौर में सही देखभाल, संतुलित आहार और निगरानी से न केवल बछड़े का स्वास्थ्य अच्छा रहता है, बल्कि माँ गाय की दुग्ध क्षमता और जीवनकाल भी बढ़ता है। यदि इस समय सावधानी न रखी जाए, तो कई जटिलआगे पढ़ें
जब बात दूध की गुणवत्ता की होती है, तो केवल मात्रा नहीं बल्कि उसका SNF (Solid-Not-Fat) और Fat प्रतिशत भी बहुत मायने रखता है। यदि दूध में फैट और एसएनएफ संतुलित है, तो उसे अच्छा रेट मिलता है। ग्वाला पशु आहार का वैज्ञानिक फॉर्मूलेशन यह सुनिश्चित करता है कि पशु को उच्च ऊर्जा, बेहतर प्रोटीनआगे पढ़ें
हर मौसम में पशु कई प्रकार की बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। इन बीमारियों का समय पर निदान और रोकथाम किसान के लिए अनिवार्य है, क्योंकि छोटी सी चूक बड़े नुकसान में बदल सकती है। कुछ सामान्य रोग: FMD (मुंह-खुर रोग): वायरस से फैलता है, दूध उत्पादन में गिरावट। ब्लोट (अफारा): गैस बनने सेआगे पढ़ें
भारत में डेयरी किसान की आय मुख्य रूप से उसके पशु के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर निर्भर करती है। यदि पशु स्वस्थ हैं, तो दूध की गुणवत्ता, मात्रा और लाभ तीनों में वृद्धि होती है।संतुलित आहार का सीधा संबंध पशु की रोग-प्रतिरोधक क्षमता, प्रजनन स्वास्थ्य और पाचन तंत्र से है। जब पशु को उसकीआगे पढ़ें
महत्व: ग्वाला पशु आहार की गुणवत्ता तब तक बनी रहती है जब इसे सही विधि से संग्रहित रखा जाए। स्टोरेज दिशा-निर्देश: फीड को साफ, सूखा, वेंटिलेटेड क्षेत्र में रखें बैग को लकड़ी या पैलेट पर रखें, फर्श से 1 फुट ऊँचा बैग को दीवार से कम से कम 1 फुट दूर रखें नियंत्रित तापमान औरआगे पढ़ें
Fat: दूध में मौजूद बटरफैट, ऊर्जा और स्वाद का स्रोत SNF (Solid Not Fat): दूध की ऐसी घटक देता है जैसे प्रोटीन, लैक्टोज, विटामिन, कैल्शियम (अधिक जानकारी)। महत्व: दूध की पोषण गुणवत्ता बफरफैट और SNF के अनुपात से मापी जाती है मानक Fat‑to‑SNF अनुपात ~ 0.66 — डेयरी उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करता हैआगे पढ़ें
परिचय:BCS एक वैज्ञानिक मापदंड है जिसमें डेयरी गायों और भैंसों की देहवसा (body fat) को 1 (बहुत पतला) से 5 (बहुत मोटा) तक स्कोर किया जाता है। यह स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता, दूध उत्पादन और पोषण योजना पर महत्वपूर्ण संकेत देता है । BCS स्कोर विवरण: स्कोर 1–2: अत्यधिक पतला – ऊर्जा की कमी से रोग-प्रतिकारकआगे पढ़ें
इस आयोजन में जयपुर और आस-पास के डेयरी किसानों ने भाग लिया। कार्यशाला में पशु स्वास्थ्य से जुड़ी प्रमुख समस्याओं पर चर्चा की गई, जैसे कि कम बॉडी कंडीशन स्कोर (BCS), पाचन संबंधी दिक्कतें, दूध उत्पादन में गिरावट आदि। विशेषज्ञों ने पशुपालकों को यह बताया कि कैसे संतुलित आहार और नियमित पोषण मूल्यांकन से इनआगे पढ़ें
इस एकदिवसीय शिविर का आयोजन शाहपुरा में स्थानीय पशुपालकों की समस्याओं को समझने और हल निकालने के उद्देश्य से किया गया। विशेष ध्यान पशुओं में मौसमी बीमारियों, दूध में कमी, कमजोरी, और संक्रमण पर केंद्रित था। उपस्थित पशु चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने ही पशुओं की जांच की और किसानों को आवश्यक दवाइयां और आहार संबंधीआगे पढ़ें
डेयरी प्रबंधन – व्हाइट रेवोल्यूशन थीम, जयपुर, 16 सितंबर 2012 यह विशेष सेमिनार भारत की श्वेत क्रांति की सफलता और आधुनिक डेयरी प्रबंधन तकनीकों को समर्पित था। कार्यक्रम में राजस्थान और अन्य राज्यों के डेयरी किसान, तकनीकी विशेषज्ञ और संगठनों ने हिस्सा लिया। मुख्य विषयों में शामिल थे: डेयरी सहकारिता मॉडल, दूध संग्रह और गुणवत्ताआगे पढ़ें








